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saisewika
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« Reply #60 on: September 28, 2009, 08:29:26 PM » |
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ॐ साईं राम
साईं प्रभु जी हो गए महासमाधि में लीन अश्रुपूरित नयन लिए भक्त खडे बन दीन
काल कराल आन खडा द्वारकामाई के द्वारे स्वयं प्रभु की आज्ञा हो तो यम भी कैसे टारे
विजयादशमी का दिवस चुना महाप्रयाण के हेत परम ईश में प्रभु मिले साधन सभी समेट
सावधान किया साईं ने भक्त जनों को आप अन्तस दानव मार कर हो जाओ निष्पाप
मार सको तो मार दो अपनी "मैं" का रावण सदगुरू साईं की शिक्षा को कर लो हृदय में धारण
भेदभाव की भेद कर मन में खडी दीवार मानव मानव से करे भातृवत अति प्यार
काम क्रोध मद मत्सर लोभ वैर द्वेष कुविचार अहंकार सब त्याग कर क्षमा हृदय में धार
यही दशहरा पर्व है दमन करो निज पाप दलो सभी विकार को बनो शुद्ध और पाक
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #61 on: October 02, 2009, 09:53:05 PM » |
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ॐ साईं राम
कैसे साईं कैसे
कैसे प्यार तुम्हारा पाऊँ कैसे पास तुम्हारे आऊँ
कैसे साईं कैसे
कैसे नयन की प्यास बुझाऊँ कैसे साईं तुझे रिझाऊँ
कैसे साईं कैसे
कैसे श्रद्धा रक्खूँ पूरी कैसे धारण करूँ सबूरी
कैसे साईं कैसे
कैसे भक्ति कर लूँ सच्ची कैसे पाऊँ शिक्षा अच्छी
कैसे साईं कैसे
कैसे बेडा होगा पार कैसे खुलेंगे मोक्ष के द्वार
कैसे साईं कैसे
साईं भेद ये सारे खोलो श्री मुख से कुछ वचन तो बोलो
कोई मार्ग सुझाओ साईं भक्त प्रेम की तुम्हें दुहाई
दुविधा खडी बडी है भारी सुलझाओ हे साईं मुरारी
इनका उत्तर मुझको दे दो ईश मिलन के मर्म को भेदो
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #63 on: October 07, 2009, 01:33:56 AM » |
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ॐ साईं राम
दो अक्षर से मिल बना साईं नाम इक प्यारा लिखते जाओ मिट जाएगा जीवन का अँधियारा
ॐ साईं राम है महामंत्र बलवान इस मंत्र के जाप से साईं राम को जान
ॐ साईं राम कह ॐ साईं राम सुन साईं नाम की छेड ले भीतर मधुर मधुर सी धुन
जागो तो साईं राम कहो जो भी सन्मुख आए साईं साईं ध्याये जो सो साईं को पाए
साईं नाम की माला फेरूँ साईं के गुण गाऊँ यहाँ वहाँ या जहाँ रहूँ साईं को ही ध्याऊँ
साईं नाम सुनाम की जोत जगी अखँड नित्य जाप का घी पडे होगी कभी ना मन्द
भक्ति भाव की कलम है श्रद्धा की है स्याही साईं नाम सम अति सुंदर जग में दूजा नाहीं
साईं साईं साईं साईं लिख लो मन में ध्यालो साईॅ नाम अमोलक धन पाओ और संभालो
साईं नाम सुनाम है अति मधुर सुखदायी साईं साईं के जाप से रीझे सर्व सहाई
सिमर सिमर मनवा सिमर साईंनाथ का नाम बिगडी बातें बन जाऐंगी पूरण होंगे काम
बिन हड्डी की जिव्हा मरी यहां वहां चल जाए साईं नाम गुण डाल दो रसना में रस आए
सबसे सहज सुयोग है साईं नाम धन दान देकर प्रभू जी ने किया भक्तों का कल्याण
घट के मंदिर में जले साईं नाम की जोत करे प्रकाशित आत्मा हर के सारे खोट
साईं नाम का बैंक है इसमें खाता खोल हाथ से साईं लिखता जा मुख से साईं बोल
साईं नाम की बही लिखी कटे कर्म के बन्ध अजपा जाप चला जो अन्दर पाप अग्नि हुई मन्द
साईं नाम का जाप है सर्व सुखों की खान नाम जपे, सुरति लगे मिटे सभी अज्ञान
मूल्यवान जिव्हा बडी बैठी बँद कपाट बैठे बैठे नाम जपे अजब अनोखे ठाठ
मुख में साईं का नाम हो हाथ साईं का काम साईं महिमा कान सुने पाँव चले साईं धाम
साईं नाम कस्तूरी है करे सुवासित आत्म गिरह बँधा जो नाम तो मिल जाए परमात्म
साईं नाम का रोकडा जिसकी गाँठ में होए चोरी का तो डर नहीं सुख की निद्रा सोए साईं नाम सुनाम का गूँजे अनहद नाद सकल शरीर स्पंदित हो उमडे प्रेम अगाध
मन रे साईं साईं ही बोल मन मँदिर के पट ले खोल मधुर नाम रस पान अमोलक कानों में रस देता घोल
श्री चरणों में बैठ कर जपूँ साईं का नाम मग्न रहूँ तव ध्यान में भूलूँ जाग के काम
साईं साईं साईं जपूँ छेड सुरीली तान रसना बने रसिक तेरी करे साईं गुणगान
साईं नाम शीतल तरू ठँडी इसकी छाँव आन तले बैठो यहीं यहीं बसाओ गाँव
साईं नाम जहाज है दरिया है सँसार भक्ति भव ले चढ जाओ सहज लगोगे पार
साईं नाम को बोल कर करूँ तेरा जयघोष रीझे राज धिराज तो भरें दीन के कोष
बरसे बँजर जीवन में साईं नाम का मेघ तन मन भीगे नाम में बढे प्रेम का वेग
उजली चादर नाम की ओढूँ सिर से पैर मैं भी उजली हो गई तज के मन के वैर
सिमरन साईं नाम का करो प्रेम के साथ धृति धारणा धार कर पकड साईं का हाथ
साईं नाम रस पान का अजब अनोखा स्वाद उन्मत्त मन भी रम गया छूटे सभी विषाद
साईं नाम रस की नदी कल कल बहती जाए मलयुत्त मैला मन मेरा निर्मल करती जाए
साईं नाम महामँत्र है जप लो आठो याम सकल मनोरथ सिद्ध हों लगे नहीं कुछ दाम
साईं नाम सुयोग है जो कोई इसको पावे कटे चौरासी सहज ही भवसागर तर जावे
पारस साईं नाम का कर दे चोखा सोना साईं नाम से दमक उठे मन का कोना कोना
साईं नाम गुणगान से बढे भक्ति का भाव श्रद्धा सबुरी सुलभ हो चढे मिलन का चाव
मनवा साईं साईं कह बनके मस्त मलँग साईं नाम की लहक रही अन्तस बसी उमँग
सरस सुरीला गीत है साईं राम का नाम तन मँदिर सा हो गया मन मँगलमय धाम
पू्र्ण भक्ति और प्रेम से जपूँ साईं का नाम श्री चरणों में गति मिले पाऊँ चिर विश्राम
जय साईं राम
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« Last Edit: October 07, 2009, 01:50:00 AM by saisewika »
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« Reply #64 on: October 13, 2009, 08:03:03 PM » |
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ॐ साईं राम
यहाँ रहूँ या वहाँ रहूँ जहाँ में चाहे जहां रहूँ
तझसे ही बस प्रेम करूँ तेरा ही बस ध्यान धरूँ
तुझमें ये मन रमा रहे नाम मनन का समा रहे
तेरी चर्चा में सुख पाऊँ हर क्षण तुझको सन्मुख पाऊँ
नयनों में तव रूप भरा हो तुझमें श्रद्धा भाव खरा हो
कोई ऐसा साँस ना आवे संग जो तेरा नाम ना ध्यावे
नाम तेरा ले सोऊँ जागूँ तुझसे बस तुझको ही माँगूं
तुझमें ही तल्लीन रहूँ मैं तेरे भाव में लीन रहूँ मैं
चढ जाए मुझपे नाम खुमारी मर जाए भीतर का संसारी
ठोको पीटो जैसे मुझको स्व साँचे में ढालो मुझको
बस इतनी सी अरज है मेरी तुझसे जुडना गरज है मेरी
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #65 on: October 19, 2009, 07:07:16 PM » |
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ॐ साईं राम
तव दर्शन की प्यासी अखियाँ तुम बिन रहे उदासी अखियाँ
सब में ढूँढे तुझको अखियाँ दुख देती हैं मुझको अखियाँ
राह तकती हैं तेरा अखियाँ माने कहा ना मेरा अखियाँ
हर आहट पे चौंकें अखियाँ बह जाती बे मौके अखियाँ
जागे रात रात भर अखियाँ भर आती हर बात पे अखियाँ
तुझे देख मुस्काती अखियाँ सब बातें कह जाती अखियाँ
तुझसे जुडी घनेरी अखियाँ मेरी हैं या तेरी अखियाँ
जय साईं राम
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Gopal Krishan
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« Reply #66 on: October 20, 2009, 06:28:36 AM » |
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सुरेखा जी, कोइ जवाब नहीं आप का . बाबा साईं आपकी हर मुराद पूर्ण करें।
| ॐ साईं नमः |
जय श्री सांई राम 
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सब का मालिक एक--सांईराम
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« Reply #68 on: October 23, 2009, 11:31:27 PM » |
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ॐ साईं राम
ना कोई कौल किया है ना करार किया है साईं हमने तुमसे बस प्यार किया है
ना कोई दावा किया है ना ही वादा लिया है साईं तुमसे जुडने का इरादा किया है
ना कोई शर्त रक्खी है ना ही माँग रक्खी है तेरे पैरों तले हे नाथ दिल और जान रक्खी है
ना मुराद माँगी कोई ना ही आस लगाई है बस दिल में तेरे लिए इक मस्जिद बनाई है
ना कोई रसमें ही निभायी ना ही कसमें खाई हैं दिल की मस्जिद में तुझे बैठाया हे साईं है
ना ही सौदा किया है ना व्यापार किया है तुझपे साईं तन मन ये वार दिया है
जय साईं राम
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« Reply #69 on: October 28, 2009, 08:05:29 PM » |
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ॐ साईं राम
माधवराव देशपाँडे जी शिरडी धाम में रहते थे बहत्तर जन्मों से साईं सँग थे ऐसा बाबा कहते थे
बच्चों को शिक्षा देते थे गुरु धरे साईं राम सुबह शाम बस साईं जपना यही प्रिय था काम
बडे प्रेम से बाबा जी ने उनको श्यामा नाम दिया भक्ति पथ पर उन्हें बढाने का बाबा ने काम किया
धर्म ग्रन्थ कभी उनको देकर बाबा ने कृतार्थ किया संकट और सुख में भी उनका साईं नाथ ने साथ दिया
बाबाजी के भक्त प्रिय थे थोडे गुस्से वाले लेकिन सब कुछ कर रक्खा था साईं नाथ के हवाले
बाबा जी से तनिक भी दूरी उन्हें नहीं भाती थी बिछड ना जाँए देव, सोच कर जान चली जाती थी
जैसे शिव मँदिर के बाहर नन्दी खडे रहते हैं ऐसे बाबा सँग हैं श्यामा भक्त यही कहते हैं
दुखियों के कष्टों को श्यामा बाबा तक पहुँचाते थे बदले में उन भक्त जनों की ढेर दुआँऐं पाते थे
श्यामा जी के रोम रोम में साईं यूँ थे व्याप् उनकी निद्रा में चलता था साईं नाम का जाप
धन्य जन्म था श्यामा जी का बाबा का सँग पाया गत जन्मों के शुभ कर्मों से जीव देव सँग आया
युगों युगों तक दिखा ना सुना, था वो बँधन ऐसा साईं ईश और श्यामा भक्त के बीच बना था जैसा
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #70 on: October 31, 2009, 10:34:25 PM » |
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ॐ साईं राम
म्हालसापति जी परम भक्त थे बाबा जी के प्यारे साईं नाथ के अँग सँग रहते मस्जिद माई के द्वारे
बाबा जी को साईं नाम ले म्हालसापति ने पुकारा था बाबा ने भी प्रसन्न भाव से प्यारा नाम स्वीकारा था
साईं उनको बडे प्रेम से "भक्त" कहा करते थे सुख दुख साईं प्रसाद मान कर "भक्त" सहा करते थे
निष्काम भक्ति के प्रतीक भक्त थे श्रद्धा थी भरपूर धन तृष्णा और लोभ मोह से रहते थे अति दूर
ना ही कोई इच्छा थी उनकी ना ही थी अभिलाषा बाबा के सँग यूँ रहते थे ज्यों पानी सँग प्यासा
एक बार जाब साईं नाथ ने महासमाधि लगाई तीन दिवस तक प्राण चिन्ह भी दिया नहीं दिखलाई
म्हालसापति बैठे रहे पावन देह को गोद धरे अडिग रह कर साईं नाथ की प्रतीक्षा वो करते रहे
उनको था विश्वास कि देव शीघ्र चले आऐंगे भक्तों को बीच भँवर में छोड साईं नहीं जाऐंगे
धन्य धन्य थे म्हालसापति जी बाबा के रक्षक बने घोर विरोध सह कर भी साईं के सँग रहे तने
महासमाधि पर्यन्त "भक्त" बाबा जी के साथ रहे साया बन कर साईं नाथ का सुख दुख उनके सँग सहे
बाबा जी की महासमाधि के चार वर्ष के बाद साईं में जा लीन हुए वो मिला नाद से नाद
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #71 on: November 02, 2009, 09:20:47 PM » |
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ॐ साईं राम
बढ भागी थे तात्या कोते मालिक के सँग रहते थे बाबा उनको बडे प्रेम से छोटा भाई कहते थे
भले बुरे का ज्ञान नहीं था तात्या छोटे बालक थे पर बाबा उनके रक्षक थे बाबा उनके पालक थे
कभी कभी बाबा की बातें वो सुनी अनसुनी कर देते थे तब बाबा उन के कष्टों को अपने ऊपर ले लेते थे
द्वारकामाई में बाबा के सँग तात्या चौदह वर्ष रहे तीन दिशा में पैर जोडकर सुख दुख सारे सुने कहे
क्या हित में है तात्या के ये बाबा जी बतलाते थे बडे प्रेम से देवा उनको भला बुरा समझाते थे
तात्या भी परछाईं बन कर सदा रहे बाबा के साथ अँत समय तक फिर ना छोडा साईं ने भी उनका हाथ
अन्तर्यामी साईं ने था देख लिया तात्या का अँत कृपा सिंधु करतार ने तब कृपा वृष्टि थी करी अनन्त
तात्या के बदले साईं ने मृत्यु को स्वीकार किया प्राणों से बढकर बाबा ने तात्या को था प्यार दिया
धन्य धन्य हे साईं देव भक्त प्रेम अति सुखदाई जीवन के पग पग पर रक्षा करते रहते सर्व सहाई
जय साईॅ राम
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saisewika
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« Reply #72 on: November 05, 2009, 10:02:46 PM » |
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ॐ साईं राम
भागो जी शिंदे नामक बाबा के इक भक्त थे देवा के सँग साया बन कर वो रहते हर वक्त थे
बाह्य दृष्टि से देखो तो वो लगते थे दुर्भागी से तन की पीडा घोर सही थी कुष्ठ रोग की व्याधि से
महारोग से पीडित थे वो जर्जर उनकी काया थी लेकिन उन पर साईं नाथ के वरद हस्त की छाया थी
उनका कोई महापुण्य ही जीवन मे सन्मुख आया इसीलिेए तो भागो जी ने साईं का सँग था पाया
बाबा के प्रधान सेवक थे हर दम साथ रहते थे साईं नाथ का प्रेम और क्रोध सम रह कर वो सहते थे
साँयकाल में बाबा जी जब लेण्डी बाग को जाते थे भागो छाता ताने चलते फूले नहीं समाते थे
एक बार जब साईं नाथ ने नन्हा शिशु बचाने को अपना हाथ आग में डाला परम कृपा बरसाने को
तब सेवा का अवसर पाया भागो जी के जागे भाग तेल लगा कर पट्टी करते देवा का वो थामें हाथ
अँत समय तक चली ये सेवा साईं ने ना मना किया ले कर सेवा भागो जी की उनको आशिर्वाद दिया
भागो जी के पुण्य जागे जब साईं के साथ हुए पाप सब कट गए उनके भागो जी कृतार्थ हुए
धन्य धन्य हे साईं देव भक्त की पीडा हरने वाले धन्य धन्य हे भक्त महान सब कुछ अर्पण करने वाले
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #73 on: November 10, 2009, 08:37:31 AM » |
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ॐ साईं राम
नानावली बाबा का भक्त शिरडी में ही रहता था बडा दीवाना मतवाला सा उसे ज़माना कहता था
बाबा के सन्मुख, अँतर ना था उसमें और सब भक्तों में ढाल बना खडा रहता था भले बुरे सब वक्तों में
बाबा से कहते थे सब ही दीवाने को दूर हटाओ भक्तों को ये तँग करता है सबको इससे आप बचाओ
पर बाबा तो दयामयी थे करूणा के अवतार भक्त प्रिय को करते थे वो हृदय से स्वीकार
वो भी बाबा से करता था जान से बढकर प्यार बुरा जो कहता कोई, तो होता लडने को तैयार
एक बार नानावली ने बाबा जी से बोला यूँ मुझे बैठना है गादी पर जिस गादी पर बैठे तुम
उठ बैठे गादी से बाबा नानावली से कुछ नहीं कहा भक्तों का उन्माद और प्रेम बाबा जी ने सदा सहा
ऐसा सच्चा भक्त था वो सब दुनिया से न्यारा बाबा जी के जाते ही दुनिया से किया किनारा
साईं नाथ की महासमाधि के तेरह दिन के अँदर परमात्मा में विलय हो गया बाबा जी का बँदर
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #74 on: November 30, 2009, 11:45:20 PM » |
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ॐ साईॅ राम
साईं सच्चरित्र रचयिता गोविंदराम था नाम जीवन गाथा लिख साईं की पाया योग सुनाम
नाना साहब की प्रेरणा से शिरडी धाम पधारे बाबाजी के दर्शन पाए अति सुन्दर अति प्यारे
प्रथम परिचय था इतना अनुपम क्षुधा तृषा सब भूले श्री चरणों का स्पर्श जो पाया सुख के पल्लव फूले
अहम भाव सब किया समर्पण साईं नाथ के आगे हेमाडपँत की पाई उपाधि सुकर्म भक्त के जागे
बाबा जी की लीला लिखी मधुर किया गुणगान भक्त जनों पर अनुग्रह करके पाया यश और मान
बाबा जी ने कृपा करी अन्तस्थल में आन बसे सच्चरित्र के शब्द शब्द से श्रद्दा और भक्ति रसे
समय समय पर साईं नाथ ने साक्षात्कार करवाया होलिकोत्सव के उत्सव में चित्र अपना भिजवाया
बाबा जी की लीलाओं को हेमाडपँत निरखते रहे दिव्यचक्षु पा साईं नाथ से चरित्र चित्रण करते रहे
साईं सँस्थान की वित्त व्यवस्था करी कुशलता सँग कार्य संभाल कर सँस्थान के किया सभी को दँग
बने मील के स्तम्भ हेमाड जी सब को राह दिखाने वाले प्रत्येक भक्त के हृदय पटल में अनुपम प्रेम जगाने वाले
सूरज चँदा तारे जब तक इस दुनिया में चमकेंगे भक्तों के तारागण में हेमाड ध्रुव तारे सम दमकेंगे
जय साईं राम
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« Reply #75 on: December 03, 2009, 10:57:33 PM » |
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ॐ साईं राम
श्री चरणों के दास की इतनी है अरदास जैसे चाहे रखना साईं पर रखना तुम पास
तुम्हें थमा दी है अब मैंने इस जीवन की डोर सब कुछ छोडा तुम पर साईं ले जाओ जिस ओर
तू ही मेरा सगा सँबंधी तू ही मेरा प्यारा तू ही पालक तू ही दाता तू ही है रखवाला
तेरे मन में है जो दाता वो है मुझको करना तेरी मरजी से जीना है तेरी मरजी मरना
तेरे इशारे पर मैं जागूँ अपनी आँखे खोलूँ तेरी लीला सुनूँ सुनाऊँ तेरी बानी बोलूँ
तुझको तुझसे माँगूं दाता तेरी भक्ति पाऊँ तेरी चर्चा में दिन बीते तेरी महिमा गाऊँ
साईं साईं करके दाता जीवन अपना काटूँ तेरा नाम इक्ट्ठा कर लूँ तेरा नाम ही बाँटूं
तेरी करनी में सुख पाऊँ सब कुछ तुझ पे छोडूँ दुनिया के सब तोड के बँधन तुझसे नाता जोडूँ
अपने द्वारे रख ले साईं किंकर मुझे बना ले सेवादार बना ले, मेरी सेवा को अपना ले
जय साईं राम
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« Reply #76 on: December 08, 2009, 08:47:33 PM » |
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ॐ साईं राम
तात्याकोते की जननी थी बायजा बाई नाम था साईं साईं रटती रहती उनका यही तो काम था
नैवेद्य अर्पण नित्त करती थी बाबा को अति भाव से साईं भी स्वीकार करते अर्पण को अति चाव से
कभी कभी तो बाबा प्यारे जँगल में चले जाते थे भूखे प्यासे तप करते थे द्वारकामाई ना आते थे
तब बायजा माँ, रोटी साग भर कर एक भगोने में खोजा करती थी साईं को वन के कोने कोने में
जब तक साईं ना मिल जाते बायजा ना वापिस आती स्वँय हाथ से उन्हें खिलाकर माता फिर तृप्ति पाती
साईं नाथ भी बडे प्रेम से उनको माता कहते थे प्रेम भरा आशिष और डाँट दोनो बाबा सहते थे
महाभाग थे बायजा माँ के ईश्वर का था साथ मिला उनके जीवन के आँगन में साईं भक्ति का फूल खिला
अँत समय तक बाबा जी ने सेवा उनकी रक्खी याद माता पुत्र के जीवन में कृपा वृष्टियाँ करी अगाध
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #77 on: December 10, 2009, 01:48:08 AM » |
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ॐ साईं राम
हाथ जोड वँदन करूँ परम दयामय नाथ स्व भक्तों के भाल पर रखना अपना हाथ
प्रातः काल.........
नित प्रातः वँदन करूँ रवि किरणों के सँग तेरे नाम सुनाम का पाऊँ मैं मकरन्द
तेरे पूजन अर्चन से सुबह शुरू हो मेरी श्रद्धा मन में धार कर करूँ सुभक्ति तेरी
दिन भर...............
सिमर सिमर तुझे हे प्रभु बीते मेरा दिन कर्मशील बन कर रहूँ काटूँ मैं पलछिन्न
दिन बीते शुभ कर्म में कर पाऊँ उपकार किसी प्राणी के लिए प्रभु हृदय में ना हो रार
मेरे कारण साईं नाथ दुखी ना कोई होवे बुरा समय जो आवे तो मन ना आपा खोवे
करते जगत के कार्य भी तुझे भजूँ हे ईश रसना से तव नाम मैं तजूँ नहीं जगदीश
साँय काल.............
साँय काल के समय में ध्याऊँ तुझे अभिराम सँध्या, कीर्तन, भजन में बीते मेरी शाम
दिन जैसे भी बीता हो शान्त रहे मेरा मन बोझिल ना हो आत्मा ना बोझिल हो तन
रात्रि काल.............
निद्रा का जब समय हो ध्याऊँ तुझे हे देव सोते में भीतर चले साईं नाम सदैव
सपने में साईं नाथ मेरे मैं शिरडी हो आऊँ सुषुप्ता अवस्था में प्रभु दर्शन तेरा पाऊँ
ऐसे तेरा नाम ले सोऊँ, जागूँ, जीऊँ साईं तेरे नाम का अमृत प्याला पीऊँ
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #78 on: December 16, 2009, 02:43:38 AM » |
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ओम साईं राम
नीयत हो अच्छी कमाई हो सच्ची तो साईं मिलेंगे
मन में उमंग हो दरस की तरंग हो तो साईं मिलेंगे
मुख पर जाप हो ह्रदय नाम व्याप हो तो साईं मिलेंगे
करुणा का भाव हो धर्म का मार्ग हो तो साईं मिलेंगे
दया हो, धृत्ति हो सत्कार्य की वृत्ति हो तो साईं मिलेंगे
हरिजन से भी प्यार हो भेदभाव ना स्वीकार हो तो साईं मिलेंगे
प्रेम का सागर हो बुद्दि उजागर हो तो साईं मिलेंगे
दिशा का ग्यान हो मार्ग की पहचान हो तो साईं मिलेंगे
सुख दुख में सम भाव हो घमंड का अभाव हो तो साईं मिलेंगे
हर हाल में आनंद हो ह्र्दय में परमानन्द हो तो साईं मिलेंगे
दर्द से नाता हो याद वो विधाता हो तो साईं मिलेंगे
जय साईं राम
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saisewika
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« Reply #79 on: December 19, 2009, 01:18:36 AM » |
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ओम साईं राम
आ जाओ अब मेरे साईं ऐसे आओ तुम मेरे मन में आन बसो और फिर ना जाओ तुम
मेरी जैसी चाल देख लो तुम बिन जो है हाल देख लो अगर तुम्हें मैं भा जाऊं तो यहीं बस जाओ तुम
पूजा अर्पण सब को परखो मन के आंदर झांको निरखो जो कोई भी मैल ना पाओ यहीं रस जाओ तुम
कविता पढ लो मेरे मन की शब्दों से जो छेड छाड की तुमको अच्छी जो लग जाए कुछ मुस्काओ तुम
मेरा भक्ती भाव देख लो साईं मिलन का चाव देख लो जो इसमें पूरी उतरूं तो दरस दिखाओ तुम
मेरे तरसे नैना देखो कटे ना काली रैना देखो नाथ तार दो अब तो आकर ना तरसाओ तुम
जय साईं राम
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